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विधि:-
  •  उत्तानपादासन करने के लिये समतल भूमि पर अपना आसन बिछाकर पीठ के बल जमीन सीधे लेट जाये ।
  • सीधे लेटकर अपने दोनों हाथों को अपनी जंघाओं की ठीक बराबर में रखकर अपनी हथेलियों को भूमि से सटाकर रखे।
  • आपके पैर के पंजे व एड़ियाँ आपस मे मिलाये और पँजे बाहर की ओर ताने।
  • अब आप गहरी लम्बी श्वास अपने नाक से अन्दर लेते हुए धीरे-धीरे अपने दोनों पैरों को एक साथ ऊपर की उठाएं और 30डिग्री पर 5सेकण्ड ऊपर की ही रोककर रखें। और कम से कम 5 आवर्ति करें यह शुरुआती अभ्यास के लिये है।
  • अपने श्वास को 5सेकण्ड जब तक आप पैर ऊपर रखें रोककर रखें आवश्यकता पड़ने पर श्वास ले भी सकते है
  • अभ्यास अच्छा होने पर अपने दोनों पैरों को फिर 60डिग्री पर रोकने का अभ्यास बनाना चाहिए।यह भी कम से कम 5सेकण्ड से शुरू करें।
  • इसकी आवर्ति को भी कम से कम पाँच बार दोहराएं अभ्यास होने पर ऊपर रुकने का समय व आवर्ति दोनों बढ़ानी चाहिए।

लाभ:-
इस आसन को नियमित करने से मोटापा दूर होकर पेट की मांसपेशियां मजबूत होती है तथा आपकी पाचन क्रिया भी अच्छी होती हैं।
जिन व्यक्तियों को बार-बार नाभि या धरण अपनी जगह हटने की समस्या रहती है वह इस आसन का अभ्यास करके इस समस्या से निजात पा सकता है।
कब्ज और हर्निया जैसे रोगों में भी यह लाभकारी आसन है।
पेट के नीचे वाले हिस्से की मजबूती के साथ-साथ यह आपके जंघाओं, कमर व कूल्हों को भी मजबूत बनाता है।
कमर के दर्द से पीडित व्यक्ति भी इस आसन का अभ्यास कर सकते है किन्तु यह सावधानीपूर्वक किसी अच्छे योग शिक्षक के सानिध्य में ही करना चाहिये।



सावधानियां:-
  • स्लिप डिस्क(Slip disc), उच्चरक्तचाप,अल्सर व पेट की सर्जरी वाले व्यक्तियों को इस आसन का अभ्यास नही करना चाहिये।
  • गर्भवती महिलाओं को इस आसन का अभ्यास नही करना चाहिये।
  • महिलाओ को मासिकधर्म के समय इस आसन को करने से परहेज करना चाहिये।
  • सियाटिका दर्द से पीडित व्यक्ति को इस आसन का अभ्यास करने से बचना चाहिये यदि करें तो किसी अच्छे योग शिक्षक की सलाह लेकर करना चाहिये।

आवश्यक निर्देश:-कोई भी योगासन का अभ्यास करते समय अपनी आँखें बन्द व मन को एकाग्र कर उस आसन से प्रभावी शरीर के अंगो पर केन्द्रित करने से आसन अधिक लाभकारी होता है।

उत्तानापादासन करने की विधि ,लाभ और सावधानियां


विधि:-
  •  उत्तानपादासन करने के लिये समतल भूमि पर अपना आसन बिछाकर पीठ के बल जमीन सीधे लेट जाये ।
  • सीधे लेटकर अपने दोनों हाथों को अपनी जंघाओं की ठीक बराबर में रखकर अपनी हथेलियों को भूमि से सटाकर रखे।
  • आपके पैर के पंजे व एड़ियाँ आपस मे मिलाये और पँजे बाहर की ओर ताने।
  • अब आप गहरी लम्बी श्वास अपने नाक से अन्दर लेते हुए धीरे-धीरे अपने दोनों पैरों को एक साथ ऊपर की उठाएं और 30डिग्री पर 5सेकण्ड ऊपर की ही रोककर रखें। और कम से कम 5 आवर्ति करें यह शुरुआती अभ्यास के लिये है।
  • अपने श्वास को 5सेकण्ड जब तक आप पैर ऊपर रखें रोककर रखें आवश्यकता पड़ने पर श्वास ले भी सकते है
  • अभ्यास अच्छा होने पर अपने दोनों पैरों को फिर 60डिग्री पर रोकने का अभ्यास बनाना चाहिए।यह भी कम से कम 5सेकण्ड से शुरू करें।
  • इसकी आवर्ति को भी कम से कम पाँच बार दोहराएं अभ्यास होने पर ऊपर रुकने का समय व आवर्ति दोनों बढ़ानी चाहिए।

लाभ:-
इस आसन को नियमित करने से मोटापा दूर होकर पेट की मांसपेशियां मजबूत होती है तथा आपकी पाचन क्रिया भी अच्छी होती हैं।
जिन व्यक्तियों को बार-बार नाभि या धरण अपनी जगह हटने की समस्या रहती है वह इस आसन का अभ्यास करके इस समस्या से निजात पा सकता है।
कब्ज और हर्निया जैसे रोगों में भी यह लाभकारी आसन है।
पेट के नीचे वाले हिस्से की मजबूती के साथ-साथ यह आपके जंघाओं, कमर व कूल्हों को भी मजबूत बनाता है।
कमर के दर्द से पीडित व्यक्ति भी इस आसन का अभ्यास कर सकते है किन्तु यह सावधानीपूर्वक किसी अच्छे योग शिक्षक के सानिध्य में ही करना चाहिये।



सावधानियां:-
  • स्लिप डिस्क(Slip disc), उच्चरक्तचाप,अल्सर व पेट की सर्जरी वाले व्यक्तियों को इस आसन का अभ्यास नही करना चाहिये।
  • गर्भवती महिलाओं को इस आसन का अभ्यास नही करना चाहिये।
  • महिलाओ को मासिकधर्म के समय इस आसन को करने से परहेज करना चाहिये।
  • सियाटिका दर्द से पीडित व्यक्ति को इस आसन का अभ्यास करने से बचना चाहिये यदि करें तो किसी अच्छे योग शिक्षक की सलाह लेकर करना चाहिये।

आवश्यक निर्देश:-कोई भी योगासन का अभ्यास करते समय अपनी आँखें बन्द व मन को एकाग्र कर उस आसन से प्रभावी शरीर के अंगो पर केन्द्रित करने से आसन अधिक लाभकारी होता है।

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