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मोटापा आधुनिक जीवन शैली की देन माना जाता है। यह रोग अधिकतर उन लोगो मे देखा जाता है शारीरिक श्रम नही करते है। आधुनिक समय मे जीवन को आसान बनाने वाली विज्ञान एवं तकनीक से उपजी भौतिक सुख सुविधाओं, असन्तुलित खान-पान एवं आचार -विचार के कारण व्यक्ति आज मोटापे से ग्रसित होते जा रहे है। हर उम्र के व्यक्तियों में मोटापा देखने को मिलता है।अत्यधिक मोटापा होने की समस्या आजकल विश्व की बहुत बड़ी समस्या बन गयी है। अधिकतर शहरी लोग इसकी चपेट में आ रहे है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार 25से 30 वर्षो के अन्तर्गत मोटापे से ग्रसित लोगो की सँख्या दो गुणी हो गयी है। यह बहुत से रोगों का कारण भी है।मोटापे का अर्थ शरीर मे अत्यधिक वसा का संचय तथा वजन में अत्यधिक वृद्धि होना है यह जीवन काल को कम कर अनेक स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं को भी जन्म देता है। इससे शरीर के विभिन्न संस्थान जैसे हृदय, श्वसन, उत्सर्जन संस्थान आदि पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है।तथा विभिन्न रोग जैसे हृदय रोग,मधुमेह, उच्चरक्त चाप, गठिया आदि उत्त्पन्न हो जाते है।

लक्षण:-
थोड़ी सी मेहनत करने पर ही हांफने लगना।
शरीर मे कमजोरी व आलस्य रहना।
अधिक पसीना व अधिक भूख लगना।
शरीर से दुर्गन्ध आना, शरीर मे थुलथुलापन होना व स्फूर्ति न होना।

कारण:-

अधिक चर्बीयुक्त वाले भोजन का प्रयोग, अधिक मीठा खाने से मोटापा बढ़ता है।
शारीरिक व्यायाम  व शारीरिक परिश्रम न करना।
बार-बार खाने व अत्यधिक भोजन करने से भी मोटापा बढ़ता है।
हार्मोन की गडबडी जैसे थाइरॉइड ग्रन्थि के स्त्राव में असंतुलन होने से भी मोटापा बढ़ जाता है।



उपचार:-
मोटापे को नियन्त्रित करने में योगाभ्यास अत्यन्त प्रभावकारी है। अतः कम से कम 1या 2 घन्टे का योगाभ्यास अवश्य करें।
योगासन के अंतर्गत ताड़ासन, कटिचक्रासन, भुजंगासन, पादहस्तासन, पश्चिमोत्तानासन, हलासन,उत्तनापादासन सर्वांगासन धनुरासन व सूर्यनमस्कार आदि अभ्यासों को शामिल करें।
अधिक लाभ के लिये कुंजल क्रिया व सनखप्रखसालन आदि क्रियाओ का अभ्यास किसी योग्य योग शिक्षक से सीखकर करना चाहिये।
प्राणयाम में भस्त्रिका व कपालभाति  आदि जा अभ्यास करें।
 सप्ताह में एक उपवास जरूर करें।


अपथ्य:-
चर्बीयुक्त पदार्थो जा सेवन जैसे चावल , दूध, मिठाइयां,दूध से बने पदार्थ, रिफाइन्ड आदि ।
माँसाहार व मदिरा आदि के सेवन से बचे।
दिन में अधिक न सोयें व बाज़ारी चीजो का सेवन न करें।

पथ्य:-
कच्ची सब्जिया व सलाद का प्रयोग नियमित करें।
फल व सब्जियों का सूप पीने की आदत डालें।
ताज़ा व सुपाच्य भोजन करें।

बेहद आसान है मोटापा कम करना, जानिए लक्षण कारण व उपचार


मोटापा आधुनिक जीवन शैली की देन माना जाता है। यह रोग अधिकतर उन लोगो मे देखा जाता है शारीरिक श्रम नही करते है। आधुनिक समय मे जीवन को आसान बनाने वाली विज्ञान एवं तकनीक से उपजी भौतिक सुख सुविधाओं, असन्तुलित खान-पान एवं आचार -विचार के कारण व्यक्ति आज मोटापे से ग्रसित होते जा रहे है। हर उम्र के व्यक्तियों में मोटापा देखने को मिलता है।अत्यधिक मोटापा होने की समस्या आजकल विश्व की बहुत बड़ी समस्या बन गयी है। अधिकतर शहरी लोग इसकी चपेट में आ रहे है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार 25से 30 वर्षो के अन्तर्गत मोटापे से ग्रसित लोगो की सँख्या दो गुणी हो गयी है। यह बहुत से रोगों का कारण भी है।मोटापे का अर्थ शरीर मे अत्यधिक वसा का संचय तथा वजन में अत्यधिक वृद्धि होना है यह जीवन काल को कम कर अनेक स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं को भी जन्म देता है। इससे शरीर के विभिन्न संस्थान जैसे हृदय, श्वसन, उत्सर्जन संस्थान आदि पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है।तथा विभिन्न रोग जैसे हृदय रोग,मधुमेह, उच्चरक्त चाप, गठिया आदि उत्त्पन्न हो जाते है।

लक्षण:-
थोड़ी सी मेहनत करने पर ही हांफने लगना।
शरीर मे कमजोरी व आलस्य रहना।
अधिक पसीना व अधिक भूख लगना।
शरीर से दुर्गन्ध आना, शरीर मे थुलथुलापन होना व स्फूर्ति न होना।

कारण:-

अधिक चर्बीयुक्त वाले भोजन का प्रयोग, अधिक मीठा खाने से मोटापा बढ़ता है।
शारीरिक व्यायाम  व शारीरिक परिश्रम न करना।
बार-बार खाने व अत्यधिक भोजन करने से भी मोटापा बढ़ता है।
हार्मोन की गडबडी जैसे थाइरॉइड ग्रन्थि के स्त्राव में असंतुलन होने से भी मोटापा बढ़ जाता है।



उपचार:-
मोटापे को नियन्त्रित करने में योगाभ्यास अत्यन्त प्रभावकारी है। अतः कम से कम 1या 2 घन्टे का योगाभ्यास अवश्य करें।
योगासन के अंतर्गत ताड़ासन, कटिचक्रासन, भुजंगासन, पादहस्तासन, पश्चिमोत्तानासन, हलासन,उत्तनापादासन सर्वांगासन धनुरासन व सूर्यनमस्कार आदि अभ्यासों को शामिल करें।
अधिक लाभ के लिये कुंजल क्रिया व सनखप्रखसालन आदि क्रियाओ का अभ्यास किसी योग्य योग शिक्षक से सीखकर करना चाहिये।
प्राणयाम में भस्त्रिका व कपालभाति  आदि जा अभ्यास करें।
 सप्ताह में एक उपवास जरूर करें।


अपथ्य:-
चर्बीयुक्त पदार्थो जा सेवन जैसे चावल , दूध, मिठाइयां,दूध से बने पदार्थ, रिफाइन्ड आदि ।
माँसाहार व मदिरा आदि के सेवन से बचे।
दिन में अधिक न सोयें व बाज़ारी चीजो का सेवन न करें।

पथ्य:-
कच्ची सब्जिया व सलाद का प्रयोग नियमित करें।
फल व सब्जियों का सूप पीने की आदत डालें।
ताज़ा व सुपाच्य भोजन करें।

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